Poet, Author, Blogger
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जगत जननी अम्बे,मेरी सुध भी तूं ले ले
हे राधे,गायत्री चरण निज शरण तूं दे दे
नमस्ते दुर्गे सरस्वती च नमस्ते
नमस्ते काली गायत्री च नमस्ते
नमस्ते उमा जग कल्याणकारी
माँ दुर्गा नमस्ते, नमस्ते नमस्ते
जगत का पालन भी अंब तुम ही करती हो
हमारी की रक्षा में चण्डी का रूप धरती हो
शताक्षी हे गौरी माँ राधे उमा तुम्ही हो
लक्ष्मी सीता भी, परमेश्वरी जगत की
नमः योगिनी योगमाया नमामि
नमः ब्राम्हिनी विश्वतेजा नमामि
नमामि काली, कलकंठी कराली
परमेश्वरी सिद्धिदात्री नमामि
हम अज्ञानी माता तेरी महिमा बखानूँ कैसे
बता दो तुम ही माँ, तुमको मैं पुकारूँ कैसे
ब्रम्हा की बुद्धि भी, जिसे नही जान पाई
वही वाली मैया, भगत को गोंद खिलाई
राष्ट्रीय कवि संगम राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगदीश मित्तल का दो दिवसीय प्रवास काशी प्रांत के प्रयागराज एवं कोशाम्बी में हुआ। इस दौरान प्रांतीय बैठक एवं होली मिलन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया | इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय अध्यक्ष श्री शिव कुमार व्यास, प्रांतीय संरक्षक पूर्व विधायक श्री लालबहादुर, प्रांतीय अध्यक्ष श्री राज अग्रहरि भी रहे। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक क्षमता बढ़ाने एवं कलम से राष्ट्र जागरण करने का आव्हान किया । काशी प्रांत में कुछ नए दायित्वों की घोषणा भी की । जिसमें श्री अटल नारायण को प्रांत महामंत्री, श्री चंद्र भूषण चंद्र को प्रांत मंत्री एवं श्री गित्यम उपाध्याय जी को ज़िला मिर्ज़ापुर का संयोजक नियुक्त किया गया।
बैठक के उपरांत कोशाम्बी में भव्य होली मिलन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि श्री बाबूलाल तिवारी एम एल सी प्रयागराज एवं झाँसी क्षेत्र, ज़िले के डी एम, पुलिस अधीक्षक, भाजपा ज़िला अध्यक्ष, कई पूर्व विधायक, श्री रोनक कुमार (होटल प्रयाग इन) एवं समाज के कई सम्मानित गण उपस्थित रहे। इस अवसर पर राष्ट्रीय कवि संगम के काशी प्रांत के संरक्षक एवं पूर्व विधायक लाल बहादुर जी, प्रांत अध्यक्ष राज अग्रहरि, प्रांत महामंत्री अटल नारायण उपस्थित रहे। कवि सम्मेलन में शिवकुमार व्यास, अटल नारायण, सुनील नवोदित, डॉक्टर नीलिमा मिश्रा, कमलेश कमल, धीरेंद्र सिंह नागा, चंद्र भूषण चंद्र, गित्यम उपाध्याय आदि की कविताओं को बहुत सराहा गया। खचाखच भरे पंडाल में फूलों एवं चंदन तिलक से खेली गई होली मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम इतना रोचक एवं संस्कारक्षम था की प्रशासनिक अधिकारी कार्यक्रम के अंत तक बैठक रहे|
स्वीकार है, स्वीकार है हमें धर्मपथ स्वीकार है माँ भारती की अर्चना में हम सदा तैयार हैं चाहे सुमनमय यह डगर हो या कंटको से हो भरी हमने भी माता भारती की ज्ञानमय वीणा सुनी उस परम ज्योति किरण से ज्योतिर्मय उदगार है स्वीकार है स्वीकार है